
इतिहास के पन्ने गवाह है कि हम वैदिक काल में थे। हमारा देश सोने की विडिया कहलाता था। हमारा देश ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी ज्ञान, गणितीय ज्ञान, चिकित्सीय ज्ञान एवं आध्यात्मिक ज्ञान में सारी दुनिया का मार्गदर्शन करता था। भारत देश की सभ्यता और संस्कृति की जड़ें अपनी अध्यात्मवादी धरा में बहुत गहराई तक फैली है। सुटुम्बकम् के महाभाव से अनुप्राणित भारत राष्ट्र को अतीत में विश्व कुलगुरु की समामिली। महर्षि वरिष्ठ कृष्ण पायन, वेद व्यास, संदीपनी पतंजलि के इस देश में सहयों वर्षों से शिक्षा का एकमेव आधार गुरुकुल प्रणाली रही है। समूचे शिक्षा तंत्र का उद्देश्य नैतिकता की सुहृद नीव पर मानव जीवन का सुन्दर भयन खड़ा करना था। वेदों की चिरशाश्वत ध्वनि और महर्षि दधिची के तप व बलिदान से समाविष्ट सांस्कृतिक परम्पराओं से भारत की अतुल्य विरासत देदीप्यमान है। भारतीय समाज के बदलते परिदृश्य में अपनी अनुपम विरासत के अध्ययन अध्यापन और शोध कार्य की महती आवश्यकता है। जीवन दर्शन के अनुरूप विचारधाराएँ हर एक समाज की व्यवस्थाओं को दिशा व गति प्रदान करती है। समय की पगडण्डी पर प्रायः विचार धाराओं और वादों में स्वाभाविक परिवर्तन आते हैं। भारत के जनगण को राष्ट्र की गौरवशाली सांस्कृतिक परम्पराओं का अहसास कराने, उन्हें जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने, आदर्श मूल्यों व मर्यादाओं को आचरण में ढालने तथा प्राचीन भारत की विशुद्ध चेतना को जगाने का समय आ गया है। इसी कड़ी में शिक्षा के आधुनिकीकरण तय नव-परिवर्तनों को लक्ष्यबद्ध कर ज्योति परिवार का प्रयास जारी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमने एक सबल, सशक्त, समुन्नत राष्ट्र का निमार्ण करने की कल्पना की थी, उसी समय हमने यह भी सोचा था कि असमानता, अन्याय, ऊंच-नीच, भेदभाव एवं शोषण विहीन समाज की स्थापना कर सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक रूप से भी सबल व सशक्त होंगे। आज जरूरत है कि खोई हुई चेतना को जगाने की और खोये हुए आदमी को तलाशने की मित्रों, यह सत्य है कि जीवित जागृत एवं ज्वलंत समाज की रचना कल-कारखानों, बाँधों, ऊंची इमारतों, पुलों से नहीं बल्कि व्यक्ति निर्माण से होगी। व्यक्ति निर्माण किये बिना वैभवशाली भारत की • पुनर्स्थापना का चिन्तन दिव्य स्वप्न होगा। व्यक्ति निर्माण करेगा ज्ञानवान, निष्ठावान, चरित्रवान एवं कर्तव्यनिष्ठ अध्यापक, समर्पित एवं धर्मनिष्ठ अध्यापक ऐसा अध्यापक जो छात्रों को ज्ञान पिपासु जिज्ञासु बनाएं और उनमें ज्ञान प्राप्त करने की मूख पैदा करें।